साधना

साधना

साधना का महत्व:

श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ (भारत) का मुख्य उद्देश्य है –

✨ संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की शिक्षाओं और साधना को जन-जन तक पहुँचाना।

साधना का सार

✅ गुरु रविदास जी मानते थे कि सच्चा धर्म है

✅ भक्ति (सच्चे मन से ईश्वर की आराधना)

✅ समता (सबको बराबरी का अधिकार)

✅ सेवा (मानवता की निस्वार्थ सेवा)

👉 उनका संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” साधना का मूल आधार है – यानी यदि मन शुद्ध है, तो हर कर्म ईश्वर-पूजन समान है।

साधना के मार्ग

✅ नाम-स्मरण व भजन – गुरु रविदास जी के पदों और भजनों का गान।

✅ समूहिक सत्संग – भक्ति वाणी का श्रवण और मनन।

✅ सेवा और दान – समाज के गरीब, वंचित और असहाय लोगों की मदद।

✅ समानता की साधना – जाति-पांति व भेदभाव को मिटाकर सभी को भाईचारे से जोड़ना।

साधना का उद्देश्य

✅ मानव को आध्यात्मिक शांति देना।

✅ समाज में समानता, प्रेम और भाईचारे की स्थापना।

✅ गुरु रविदास जी के आदर्शों पर चलकर न्यायपूर्ण और मानवतावादी समाज का निर्माण।

श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ (भारत) साधना के इन सिद्धांतों के माध्यम से समाज को नई दिशा और प्रेरणा देने का कार्य कर रहा है।

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